रात अँधेरी थी, घोर थी पीड़ा,
ग़ुलामी की जंजीरें थीं भारी,
हर बग़ीचे में लहू खिला था,
हर दिल में थी लौ बलिदानी प्यारी।
किसी ने फाँसी का फंदा चूमा,
किसी ने गोली सीने खाई,
किसी ने खेतों में खून बहाकर,
आज़ादी की राह सजाई।
15 अगस्त की वो पावन सुबह,
जब पहली बार तिरंगा लहराया,
लाल क़िले की प्राचीर से,
स्वतंत्र भारत का स्वर आया।
बच्चे हँसे, जवान मुस्काए,
बुज़ुर्गों की आँखें भर आईं,
हर गली-चौक में गीत बजे,
"जय हिंद" की गूँजें छा गईं।
पर ये आज़ादी केवल उपहार नहीं,
बलिदानों की अमर निशानी है,
ये मिट्टी हर बूँद को पहचानती,
जो इसकी रक्षा में क़ुर्बानी है।
आओ हम फिर वही प्रण लें,
जो वीरों ने दिल में सजाए,
भारत को न केवल आज़ाद रखें,
बल्कि इसे स्वर्ग बनाएँ।
Happy Independence day to everyone 🇮🇳🇮🇳
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